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राष्ट्रीय प्रेस दिवस पर संगोष्ठी की पत्रकारों ने

, 16 नवंबर दिलदारनगर गाजीपुर स्वर्गीय डॉक्टर सुधाकर पांडे के आवास पर राष्ट्रीय प्रेस दिवस के अवसर पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया संगोष्ठी में बतौर मुख्य अतिथि प्रदेश के वरिष्ठ , साहित्यकार एवं पत्रकार श्री धीरेंद्र श्रीवास्तव ने कहा की 4 जुलाई 1966 को प्रेस परिषद की कल्पना की गई थी जो 16 नवंबर 19 66 से प्रभावी ढंग से कार्य करने लगा प्रेस परिषद की स्थापना के पीछे पत्रकारों के कल्याण मान सम्मान एवं अधिकारों की रक्षा एवं समाचार पत्रों के कार्य कार्यप्रणाली को अनुशासित रखने के लिए इसकी स्थापना की गई जिसे और कारगर तथा प्रभावी बनाना होगा lइस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार जनार्दन सिंह ज्वाला ने कहा कि पत्रकार समाज का आईना होता है वह कठिन परिस्थितियों में भी आम जनता की भावनाओं को उजागर करता है और सरकार की भावनाओं को जनता तक पहुंचाता है lवरिष्ठ पत्रकार वेद प्रकाश श्रीवास्तव ने कहा कि राष्ट्र के इस चौथे स्तंभ कि आज कोई सुरक्षा नहीं है पत्रकारों पर हमले हो रहे हैं गत वर्ष से अब तक प्रदेश में पत्रकारों पर पुलिसिया उत्पीड़न की गति तेज हुई है पूर्व में प्रदेश में 3 के घटाएं घटित हुई उस में कहीं भी प्रभावी न्याय नहीं मिल पाया उस पत्रकार के परिजनों को l यह बात हमेशा याद रखनी चाहिए सशक्त विचार और लेखनी से ही हर युग में परिवर्तन हुआ है पत्रकारों के सुरक्षा एवं कल्याण के लिए सरकार को एक आयोग बनाना चाहिए जिसकी जांच एवं अनुमति के बाद ही पुलिस पत्रकारों पर किसी तरह का अभियोग पंजीकृत कर सके l प्रशासन में बैठे भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारियों के विरुद्ध समाचार प्रकाशित करने पर उनका उत्पीड़न किया जा रहा है कहने को तो चौथा स्तंभ है कहा जाता है किंतु हमारे संविधान में इस तरह कि कहीं कोई मौलिक अधिकार पत्रकारों के लिए अलग से नहीं है मौलिक अधिकार l पत्रकार एवं लेखक तौसीफ गोया ने कहा कि पत्रकार अपनी लेखनी के माध्यम से फर्श से अर्श तक और अर्श से फर्श तक भी पहुंचाने का कार्य करता है उसका मन उसका विचार आम आदमी से सदैव ऊपर होता है एक आम आदमी से अधिक समाज की विसंगतियों बुराइयों पर पैनी निगाह रखता है और उसे उजागर कर सरकार को अवगत कराता है l संगोष्ठी की अध्यक्षता वरिष्ठ समाजसेवी एवं साहित्यकार सुरेंद्र पांडे ने किया

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