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भरोसे के अभाव में दगा खा गये लेखपाल, हुए गिरफतार,

गाजीपुर। प्रदेश सरकार के भ्रष्टाचार के जीरो टालरेन्स की नीति को सुनियोजित व संगठित भ्रष्टाचार में लिप्त कर्मचारियो व अधिकारियो ने जम कर पलीता लगाया है। लेखपाल की गिरफतारी तो महज बानगी है। पब्लिक डीलिंग काउण्टर पर अधिकारियो व कर्मचारियों ने भरोसेमंद दलालों की फौज तैयार कर खुद को साफ-पाक बनाये रखा है। जिसे सरकार के लाख प्रयास के बावजूद गिरेबा तक कोई हाथ नही डाल सकता। चर्चाओं की माने तो दलालो पर भरोसा न जता कर रंगेहाथ गिरफतार हो गये लेखपालों की फेहरिस्त लम्बी है। सुनियोजित तरीके से फल फूल रहा भुष्टाचार के खेल में कोई भी अधिकारी व कर्मचारी सीधे तौर पर संलिप्त नही होता जो भी होता है वह उसके चहेतो दलालों के माध्यम से भरोसे के आधार पर रिश्वत का खेल चलता है और सरकारी योजनाओं का जमकर पलीता लगाया जाता है। जिससे आमजन में सरकार की छवि धुमिल होकर बदनाम हो जाती है। योगी सरकार के सख्त रवैया के बावजूद भ्रष्ट कर्मचारी अपने मंसुबो में कामयाब हो जा रहे है। सैदपुर क्षेत्र में तैनात गोरखा गांव के लेखपाल प्रमोद कुमार को पांच हजार रूपये घूस लेते एन्टी करप्शन टीम ने रंगेहाथ ओैड़िहार बाजार से गिरफतारी कर राजस्व प्रशासन में खलबली मचा दी। लेखपाल के खिलाफ सैदपुर कोतवाली में मुकदमा दर्जकर संबंधित धारा के तहत कार्रवाई करते हुए मुकदमा दर्ज कर दिया। शिकायतकर्ता मूलचन्द यादव की शिकायत पर एक सप्ताह पूर्व एन्टी करप्शन टीम वाराणसी ने क्षेत्रीय लेखपाल की गिरफतारी की बिसात बैठा चुकी थी। जिसके तहत लेखपाल द्वारा जमीन की पैमाइस आख्या लेने के नाम पर पांच हजार की रिश्वत मांगी गयी और शुक्रवार को औड़िहार बाजार में पहुंकर बाजार के मेन रोड पर जैसी ही पीड़ित ने रंग लगा रिश्वत का रूपया लेखपाल के हाथ में दिया, एन्टी करप्शन टीम ने उसे गिरफतार कर लिया। कुछ दिन पूर्व दुसरे वाकया में जमानियां क्षेत्र कानूनगो जमीन पैमाईश के नाम पर चार हजार रूपये घुस लेने का आडियों वायरल हुआ जिसे तहसील प्रशासन ने मामले को दबा दिया और शिकायतकर्ता विजय नरायन राय की खेत की आजतक पैमाईश नही की गयी। जिसकी शिकायतकर्ता ने आईजीआरएस पोटर्ल के माध्यम से मुख्यमंत्री से की है। तीसरा प्रकरण जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के तहत देवकली बीआरसी पर तैनात एबीएसए राजेश यादव के कारखास द्वारा सात हजार रूपये घुस लेने के मामले में निलम्बित हो गया, वही एबीएसए राजेश यादव अन्यत्र स्थानान्तरण करा बेदाग अधिकारी का तमगा लगा अपने मुहिम में कामयाबी का शोहरत हासिल किये जा रहा है। तो वही सफेदपोशो की आड़ में बिना नम्बर के दर्जनों वाहनों का संचालन कर रहे नगर पालिका प्रशासन, एआरटीओं व यातायात पुलिस को खुलेआम चुनौति दे रहा है। आखिर कबतक………

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